लोकसभा चुनाव में ईवीएम पर बढ़ता संशय

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है तथा आंकड़े बता रहे हैं कि इस बार चुनावों में लगभग 80 करोड़ मतदाता तथा लगभग दो हजार राजनितिक दल भाग लेंगे. ईवीएम मशीनों पर बार-बार लगते आक्षेपों को ध्यान में रखते हुए तथा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाये रखने के लिए चुनाव आयोग द्वारा ईवीएम मशीनों को अपग्रेड करवाया या है.

लोकसभा चुनाव में ईवीएम पर बढ़ता संशय

स्वस्थ लोकतंत्र का आधार स्तंभ स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव है. अगर चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी तरह के संशय की स्थिति बनती है तो यह परिस्थिति लोकतंत्र के लिए घातक ही कही जाएगी. भारत के चुनावी इतिहास में जब ईवीएम मशीनों से चुनाव नहीं होते थे तब मतदान केन्द्रों पर भारी धांधलियों की खबरे आम बात थी. ईवीएम मशीनों के चलन में आने के पश्चात इस परिस्थिति पर लगभग पूर्णतः अंकुश लग गया है परन्तु फर्जी मतदान की ख़बरें अभी भी आती रहती है.

यह एक विडम्बना ही है कि जो भी दल विपक्ष में होता है वह हमेशा ईवीएम से चुनाव कराने की खिलाफत करता है और सत्ताधारी दल हमेशा ईवीएम के पक्ष में खड़ा रहता है. पता नहीं सत्ता प्राप्त होते ही सत्ताधारी दल को ईवीएम से चुनाव क्यों प्यारे हो जाते हैं?

चुनाव आयोग हमेशा इस बात से इनकार करता रहा है कि ईवीएम से चुनाव पूर्णतः निष्पक्ष होते हैं तथा इनसे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है. परन्तु अभी कुछ महीने पहले एक अमेरिकी हैकर ने दावा किया था कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में ईवीएम मशीनों को हैक किया गया था. ईवीएम हैकिंग का मामला भारतीय न्यायालय तक भी पहुँच गया है परन्तु आरोप प्रत्यारोप जारी हैं.

इन्ही परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने ईवीएम मशीनों को अपग्रेड करवाया है जिसकी वजह से इस बार ईवीएम मशीनों पर सभी उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिह्न के साथ-साथ उनकी तस्वीर भी दिखाई देगी.

साथ ही प्रत्येक ईवीएम वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीन के साथ जुडी रहेगी जिसकी वजह से वोटर को अपने डाले गए मत का पता चल पायेगा. ईवीएम मशीनों को ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम भी लगा रहेगा ताकि इनकी लोकेशन हमेशा ट्रैक की जा सके.

भारत में पहली बार वर्ष 1998 में आयोजित 16 विधानसभा चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल किया गया था. एक मतदान केंद्र पर अधिकतम मतदाताओं की संख्या 1500 होती है तथा एक ईवीएम मशीन में अधिकतम 3840 मत दर्ज किए जा सकते हैं. एक ईवीएम में अधिकतम 64 उम्मीदवारों के नाम शामिल किए जा सकते हैं परन्तु वास्तविकता में मशीन में 16 नाम ही शामिल हो पाते हैं.

अगर उम्मीदवारों की संख्या 16 से अधिक होती है तो फिर मशीनों की संख्या 16 के गुणांक में बढ़ा दी जाती है. परन्तु अगर उम्मीदवारों की संख्या अगर 64 से भी अधिक हो जाए तो इस परिस्थिति में मत पत्र का इस्तेमाल किया जाता है.

ईवीएम मशीन 6 वोल्ट की साधारण एल्कलाइन बैटरी पर कार्य करती है जिसका सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि यह उन इलाकों में भी काम आ जाती है जो इलाके अभी बिजली से नहीं जुड़े हैं.

ईवीएम मशीन दो यूनिटों, कंट्रोल यूनिट और बैलेटिंग यूनिट, से बनी होती है जो आपस में एक केबल से जुडी होती है. कंट्रोल यूनिट पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के नियंत्रण में होती है तथा बैलेटिंग यूनिट वोटिंग एरिया में मतदान के लिए रखी होती है. मतदाताओं को मतदान के लिए अपने पसंदीदा उम्मीद्वार के नाम के सामने के बटन को दबाकर मतदान करना होता है.

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीएचईएल), बेंगलूर एवं इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद द्वारा किया गया था.

अब इन चुनावों में यह देखना है कि इन आरोपों प्रत्यारोपों के दौर में चुनाव आयोग किस प्रकार अपना निष्पक्षता साबित कर पाता है ताकि कोई भी दल चुनावी प्रक्रिया खासकर ईवीएम पर संदेह ना करे.

लोकसभा चुनाव में ईवीएम पर बढ़ता संशय
Increasing doubt over EVM in Lok Sabha elections

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