पीएमबीजेपी के माध्यम से बीजेपी को मिलेगा मुफ्त प्रचार

सरकार चाहे किसी भी राजनितिक दल की हो वह हमेशा सरकारी योजनाओं का राजनीतिकरण कर चुनाव में फायदा उठाने का प्रयास करती रहती है. इन सभी पार्टियों का यह प्रयास रहता है कि सभी सरकारी योजनाओं का प्रचार इस प्रकार की चतुराई के साथ किया जाए कि सरकारी योजनाओं के प्रचार के बहाने अपने राजनितिक दल का भी प्रचार हो जाए.

bjp publicity through pmbjp

सरकारी योजनाओं के बहाने अपने दल का प्रचार करने से राजनितिक दलों को दो फायदे होते हैं, एक तो इन योजनाओं के प्रचार प्रसार में सरकारी धन का व्यय होता है तथा दूसरा इन योजनाओं की पहुँच बहुसंख्यक आम जन तक होने के कारण राजनितिक दलों का प्रचार निशुल्क हो जाता है. अब तो सरकारी योजनाओं के नाम भी बदल कर बड़ी सफाई के साथ इस प्रकार रखे जा रहे हैं जिससे सत्ताधारी राजनितिक दल को मुफ्त में प्रचार मिल जाए.

pradhan mantri bhartiya jan aushadhi kendra

इस प्रकार का ताजा उदाहरण “प्रधान मन्त्री जन औषधि योजना – Pradhan Mantri Jan Aushadhi Yojna (PMJAY)” का नाम परिवर्तित होकर “प्रधान मंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना – Pradhan Mantri  Bhartiya Jan Aushadhi Pariyojna (PMBJP)” हो जाना है. नाम परिवर्तन कोई विशेष बात नहीं है तथा सभी सरकारे अक्सर पुरानी सरकारी योजनाओं के नाम अपने फायदे के अनुसार बदल देती है. अगर आप इस योजना की शोर्ट फॉर्म (PMBJP) पर गौर करेंगे तो पाएँगे कि इस योजना के नाम में पीएम के साथ बीजेपी का नाम आ रहा है.

साथ ही सभी जन औषधि केन्द्रों पर योजना की ब्रांडिंग के लिए जो बोर्ड और लोगो लगाए जाएँगे उन पर भी “प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना” को इस सफाई से डिजाईन किया गया है कि इसमें भगवा रंग में “भाजप” अलग से ही नजर आए. इस प्रकार का प्रदर्शन सत्ताधारी राजनितिक दल का प्रचार नहीं है तो और क्या है?

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नियमानुसार तथा नैतिकतानुसार भी सरकार को अपने दल के लिए नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत के लिए कार्य करना होता है क्योंकि यह भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत सरकार का दर्जा रखती है. भारत सरकार की योजनाओं के माध्यम से किसी भी दल का प्रचार भारतीय जनता से लिए जाने वाले टैक्स का दुरुपयोग ही कहलायेगा.

“जन औषधि” एक ऐसा नावेल प्रोजेक्ट था जिसे वर्ष 2008 में भारत सरकार ने एक नोबल कार्य के रूप में लांच किया था ताकि हर भारतीय को सस्ती दरों पर दवाइयाँ मिल सके. इस योजना के तहत देश के विभिन्न जिलों में “प्रधान मंत्री जन औषधि केंद्र” खोल कर इनके माध्यम से जेनेरिक मेडिसिन्स की बिक्री किया जाना सुनिश्चित हुआ. पहला “प्रधान मन्त्री जन औषधि केंद्र” 25 नवम्बर 2008 में पंजाब के अमृतसर शहर में खोला गया.

इस योजना के तहत देश के सभी 630 जिलों में कम से कम एक जन औषधि केंद्र खोला जाना सुनिश्चित हुआ जो वर्तमान में बढ़कर 4995 हो गया है.

बीपीपीआई (ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडिया) प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के लिए इम्प्लीमेंटेशन एजेंसी है जिसे 2008 में स्थापित किया गया था तथा यह सारे सीपीएसयू के सहयोग के साथ डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स के अंडर में कार्य करती है। बीपीपीआई का प्रमुख कार्य सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयाँ उपलब्ध करवाना, प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से जेनेरिक दवाइयों की मार्केटिंग करवाना, सेंट्रल फार्मा पीएसयू और निजी क्षेत्रों की कंपनियों से दवाइयों की खरीददारी करना तथा भारतीय जन औषधि केन्द्रों की उचित मोनिटरिंग करना है।

पीएमबीजेपी के माध्यम से बीजेपी को मिलेगा मुफ्त प्रचार
Free publicity to BJP through PMBJP

प्रधान मंत्री जन औषधि केंद्र कैसे खोले?