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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव परिणाम पर उठते प्रश्न

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुए एक पखवाड़े से अधिक समय बीत चुका है। सभी पूर्वानुमानों को झुठलाते हुए रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति के लिए निर्वाचित हो चुके हैं लेकिन राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव के परिणाम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। ट्रम्प के निर्वाचित घोषित होने के दूसरे दिन से ही अमेरिका में ट्रम्प के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। बहुत से लोग उन्हें अपना राष्ट्रपति स्वीकार ही नहीं कर पा रहे हैं।

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विवाद अधिक बढ़ता हुआ तब दिखाई दिया जब ग्रीन पार्टी की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार जिल स्टेन ने मतगणना में धाँधली का आरोप लगाकर तीन राज्यों विस्कोंसिन, मिशिगन और पेंसिलवेनिया में फिर से मतगणना की मांग की। जिल स्टेन का आग्रह मान लिया गया है तथा विस्कोंसिन राज्य में फिर से मतगणना करवाई जाएगी। किसी भी राज्य में फिर से मतगणना शुरू करवाने के लिए काफी बड़ी रकम जमा करवानी पड़ती है तथा इस रकम को इकट्ठा करने लिए ग्रीन पार्टी ने ऑनलाइन चंदा जमा करना शुरू किया था।

निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पुनः मतगणना को घोटाला करार देते हुए इसे ग्रीन पार्टी द्वारा अपना खजाना भरना बता रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रीन पार्टी की उम्मीदवार को कुल मिलाकर एक प्रतिशत वोट ही मिले हैं तथा किसी भी प्रकार के उलटफेर के पश्चात भी ग्रीन पार्टी की उम्मीदवार राष्ट्रपति नहीं बन सकती है। ट्रम्प की यह बात कुछ हद तक जायज भी प्रतीत होती है। हिलेरी क्लिंटन तथा ओबामा ने भी मतगणना में किसी भी प्रकार की धाँधली से इंकार किया था।

अब ग्रीन पार्टी के सुर में सुर मिलकर डेमोक्रेटिक पार्टी की पराजित उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन ने भी अन्य राज्यों में फिर से मतगणना करवाने का समर्थन किया है। हिलेरी को उम्मीद है कि अगर चुनाव परिणाम में कहीं कोई बदलाव होता है तो शायद वह अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति बन जाएगी। हिलेरी पाँपुलर वोट्स में जीत कर इलेक्टोरल वोट्स में हार गई थी।

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को दो तरह से वोट मिलते है। एक तो जनता सीधे अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देती है जिन्हें पाँपुलर वोट्स कहते हैं। दूसरा जनता अपने राज्य से निर्धारित संख्या में कुछ सदस्यों को चुनती है जिन्हें इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य कहते हैं तथा ये सदस्य बाद में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को वोट देते हैं जिन्हें इलेक्टोरल वोट्स कहते हैं। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तभी विजयी समझा जाता है जब उसे इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों का बहुमत प्राप्त हो। सामान्यतया जिस राज्य में राष्ट्रपति पद के लिए जो उम्मीदवार विजयी होता है उसे उस राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के सभी सदस्यों के वोट मिल जाते हैं। अतः पाँपुलर वोट्स के मुकाबले इलेक्टोरल वोट्स ही ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।

इलेक्टोरल कॉलेज के सभी पाँच सौ अड़तीस सदस्य उन्नीस दिसम्बर को राष्ट्रपति पद के लिए वोट देंगे तथा किसी भी उम्मीदवार के विजयी होने के लिए दो सौ सत्तर वोटों की आवश्यकता होगी। ट्रम्प की विजय निश्चित लग रही है क्योंकि ट्रम्प उन सभी राज्यों में विजयी हुए हैं जिनमे इलेक्टोरल वोट ज्यादा है। फिर से मतगणना सिर्फ इस उम्मीद में करवाई जा रही है कि जिन राज्यों में ट्रम्प बहुत कम अंतर से विजयी हुए हैं शायद वहाँ कोई उलटफेर हो जाए। दरअसल ट्रम्प की इस ऐतिहासिक विजय तथा हिलेरी की पराजय को कोई भी पचा नहीं पा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति का यह चुनाव पूरी दुनिया में काफी चर्चित हुआ क्योंकि इसके परिणाम का बहुत से देशों पर सीधा असर पड़ता है परन्तु अब इसका परिणाम चुनाव से भी ज्यादा चर्चित हो चुका है। अब अगर इसमें कही कोई धाँधली निकलती है तो यह अमेरिकी चुनाव व्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव परिणाम पर उठते प्रश्न
Questions arise on the US presidential election results