अचानक नोटबंदी का आमजन और व्यापार पर असर

प्रधानमंत्री को एक हजार और पाँच सौ के बड़े नोट बंद करने की घोषणा किये लगभग दस दिन बीत चुके हैं परन्तु बैंकों में कतारें कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही है। सरकार भी रोज नए-नए नियम लागू कर रही है। कभी तय होता है कि एक दिन में चार हजार रुपये तक बदलवा सकते हैं, कभी उसे बढ़ाकर साढ़े चार हजार कर दिया जाता है फिर अब घटाकर दो हजार कर दिया है। एटीएम पर भी नकद निकासी की सीमा दो हजार रुपये प्रतिदिन थी जिसे भी बढ़ाकर ढ़ाई हजार कर दिया गया है।

impact of sudden currency ban on public and business

देश भर के किसी भी बैंक में जाने पर सिर्फ और सिर्फ कतारें ही कतारें दिखाई पड़ रही है। लोग घंटों इन कतारों में लगे रहते हैं परन्तु फिर भी उनका नंबर नहीं आ पा रहा है क्योंकि कतारें ही इतनी लम्बी है। छह सात घंटों तक कतार में लगना तो एक सामान्य सी बात प्रतीत होती है। कई जगह तो लोग अलसुबह से ही कतार लगाने लग जाते हैं। कई बार गाली गलौच और मारपीट तक की नौबत भी आ जाती है।

आमजन का जीवन इस नोटबंदी से बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। सबसे ज्यादा गरीब, दिहाड़ी वाले और बिना दिहाड़ी वाले मजदूर, किसान, मरीज, यात्री और जिनके घर में शादियाँ होनी है, आदि लोग प्रभावित हुए हैं। अखबारों के अनुसार अब तक लगभग पैतालीस लोग इस नोटबंदी की घोषणा के पश्चात किसी न किसी तरह से प्रभावित होकर (चाहे कतार में लगकर या फिर सदमे से) मृत्यु को प्राप्त हो चुके है। कतार में लगे रहने के कारण गरीब और मजदूर के सामने अपने घर को चलानें का संकट पैदा होने लग गया है।

बैंक और एटीएम से पर्याप्त मात्रा में रकम नहीं मिलने के कारण बाजारों में पैसे की भारी कमी हो गई है जिसके कारण ऐसा लग रहा है कि जैसे पूरी व्यवस्था ही गड़बड़ा गई है क्योंकि किसी के पास भी नई मुद्रा में नकद रकम नहीं है। भारत में व्यापार अधिकतर नकद पैसों से ही होता है तथा नकद पैसा नहीं होने के कारण व्यापार धंधे पूरी तरह से ठप्प पड़े हुए हैं। बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है तथा ये चर्चाओं के चौपाल मात्र बन कर कर रह गए हैं।

ट्रांसपोर्टरों के पास नकदी नहीं होने से खानें पीनें सम्बन्धी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई भी धीरे-धीरे प्रभावित हो रही है तथा इनको अपनी ढुलाई में लगे हुए ट्रकों को बंद करना पड़ रहा है। अभी तक तो खानें पीनें सम्बन्धी आवश्यक वस्तुओं की इतनी कमी नहीं हुई है परन्तु अगर कुछ दिन तक यही स्थिति रही तो इन वस्तुओं की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप वस्तुओं की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण ये बहुत महंगी हो जाएगी।

आज की अर्थव्यस्था पूरी तरह से धन पर टिकी हुई है तथा जब व्यापारियों और आम जनता के पास धन की कमी हो जाती है तब इसका चरमराना निश्चित होता है। प्राप्त नवीनतम अनुमानों के अनुसार आगामी तिमाही में विकास दर में लगभग एक प्रतिशत तक की गिरावट का अंदाजा लगाया जा रहा है। ये केवल एक अनुमान है तथा वास्तविक आंकड़े इस बात पर निर्भर करेंगे कि हम इस तरह की परिस्थिति से कब तक निकलेंगे। जितना अधिक वक्त इस परिस्थिति से निकलनें में लगेगा उतना ही ज्यादा अर्थव्यस्था को नुकसान होगा।

इन परिस्थितियों से बचा जा सकता था अगर सरकार की पहले से कोई पुख्ता तैयारी होती। अभी तक की परिस्थितियाँ तो यही इंगित कर रही है कि सरकार ने नोटबंदी का फैसला बिना पर्याप्त तैयारी के जल्दबाजी में उठाया। दो हजार के नोट बहुत कम (लगभग नगण्य) एटीएम से ही निकल पा रहे हैं क्योंकि इनको नए नोटों के हिसाब से कैलिब्रेट ही नहीं किया गया। देश में स्थित कुल एटीएम में से लगभग बीस प्रतिशत से ज्यादा एटीएम पैसे नहीं दे पा रहे है और जो एटीएम पैसे दे रहे हैं उनमे दो तीन घंटे में पैसा समाप्त हो जाता है।

अभी तक तो इस बात की भी कोई पुष्टि नहीं है कि इस नोटबंदी का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा या नकारात्मक। बड़े नोट बंद करके फिर उनसे भी बड़े नोटों को पुनः प्रचलन में लाना भी अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रश्न है। क्या बड़े नोटों को पुनः प्रचलित करने से सरकार का वह उद्देश्य समाप्त नहीं हो जायेगा जिसके लिए उसने पुराने नोटों को चलन से एकाएक बाहर कर दिया?

अचानक नोटबंदी का आमजन और व्यापार पर असर
Impact of sudden currency ban on public and business